रीवा: मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी 27 मार्च को रीवा जिले के प्रवास पर आ रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब रीवा में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। पार्टी के भीतर गुटबाजी, संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी और हाल के चुनावों में मिली हार के बाद कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है। ऐसे में जीतू पटवारी का यह प्रवास कांग्रेस को नई ऊर्जा और ऑक्सीजन देने का प्रयास माना जा रहा है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य कमलेश्वर पटेल और सह प्रभारी रणविजय सिंह भी रीवा, सतना और सिंगरौली के दौरे पर रहेंगे, जो 26 से 28 मार्च तक चलेगा।
जीतू पटवारी का यह दौरा रीवा में कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में रीवा जिले में कांग्रेस का जनाधार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में जिले की आठ में से सात सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस केवल एक सीट पर सिमट गई। इसके अलावा, स्थानीय निकाय चुनावों और अन्य राजनीतिक गतिविधियों में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में नेतृत्व की कमी और आपसी मतभेदों ने पार्टी को कमजोर किया है। इस स्थिति में जीतू पटवारी के सामने चुनौती है कि वे कार्यकर्ताओं में जोश भरें और संगठन को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
सूत्रों के अनुसार, जीतू पटवारी 27 मार्च को रीवा में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इनमें कार्यकर्ताओं के साथ बैठक, स्थानीय नेताओं से चर्चा और जनसंपर्क अभियान शामिल हैं। उनका मुख्य फोकस रीवा जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पार्टी की जड़ें मजबूत करना होगा। इसके लिए वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। साथ ही, भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए जनता के बीच कांग्रेस की मौजूदगी को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। रीवा में किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को उठाकर वे जनता से जुड़ने का प्रयास करेंगे।
कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का मानना है कि जीतू पटवारी का यह दौरा पार्टी के लिए संजीवनी का काम कर सकता है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “रीवा में कांग्रेस की हालत बहुत खराब है। कार्यकर्ता हताश हैं और संगठन में एकजुटता की कमी है। जीतू पटवारी के पास युवा जोश और संगठनात्मक अनुभव है। अगर वे सही रणनीति के साथ काम करें, तो पार्टी फिर से खड़ी हो सकती है।” हालांकि, कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि केवल एक दौरे से हालात नहीं बदलेंगे। इसके लिए लंबे समय तक लगातार प्रयास और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।
जीतू पटवारी के साथ आने वाले अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी इस दौरे को खास बनाती है। अजय सिंह, जो रीवा क्षेत्र में लंबे समय तक प्रभावशाली नेता रहे हैं, उनकी मौजूदगी से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ सकता है। वहीं, हरीश चौधरी और कमलेश्वर पटेल जैसे नेताओं का अनुभव संगठन को नई दिशा देने में मददगार साबित हो सकता है। इस दौरे के दौरान कांग्रेस की रणनीति पर भी चर्चा होगी, जिसमें आगामी उपचुनावों और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, जीतू पटवारी के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। रीवा में भाजपा का मजबूत संगठन और स्थानीय स्तर पर उसकी सक्रियता कांग्रेस के लिए बड़ी बाधा है। इसके अलावा, कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को खत्म करना और सभी नेताओं को एक मंच पर लाना भी आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जीतू पटवारी इस दौरे में कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतने और संगठन को एकजुट करने में सफल रहे, तो यह कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत हो सकती है। लेकिन अगर यह दौरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया, तो पार्टी की स्थिति और खराब हो सकती है।
रीवा की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता इस दौरे से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। अब देखना यह है कि जीतू पटवारी अपनी ऊर्जा और रणनीति से डूबती कांग्रेस को कितना उबार पाते हैं। यह दौरा न केवल रीवा, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।